अरिया पुग्गल का धम्म (आर्य पुग्गलो की विशेषताऐं) Viewers(3)
अरिया पुग्गल का धम्म (आर्य पुग्गलो की विशेषताऐं)
सोतापन्नमग्ग
अकुसल चित्त 12 में से 5 को नष्ट करता है (दिट्ठीगतासम्पयुत्तं चित्त 4 और विचिकिच्छा चित्त 1)
सोमनस्ससहगतं दिट्ठिगता सम्पयुत्तं असंखारिकं कामावचरा अकुसल लोभमूलचित्तं।
सोमनस्ससहगतं दिट्ठिगता सम्पयुत्तंससंखारिकं कामावचरा अकुसल लोभमूलचित्तं।
उपेक्खासहगतं दिट्ठिगता सम्पयुत्तं असंखारिकं कामावचरा अकुसल लोभमूलचित्तं।
उपेक्खासहगतं दिट्ठिगता सम्पयुत्तं ससंखारिकं कामावचरा अकुसल लोभमूलचित्तं।
उपेक्खासहगतं विचिकिच्छा सम्पयुत्तं असंखारिकं कामावचरा अकुसल मोहमूलचित्तं।
(जिसने पहली बार निब्बान की ओर जाने वाली धारा में प्रवेश किया हो तथा जो अपाय में नहीं जायेगा)
यहाँ सोतापन्न के तीन स्तर है– जिनको निम्न प्रकार जानते हैं
वे सोतापन्न लोग जो स्वर्ग और पृथ्वी में अधिकतम सात बार पैदा होंगे। और वह सात जन्मों के अन्दर ही अरहन्त अवस्था को प्राप्त होगें। (सत्तक्खतुपरम)
वो सोतापन्न लोग जो अरहन्त अवस्था प्राप्त करने से पहले 2 से 3 बार आदर्श परिवारों में जन्म लेते हैं। (कोलंकोला)
वो सोतापन्न लोग जिनका जन्म अरहन्त अवस्था प्राप्त करने से पहले एक बार होगा। (एकबीजी)
एक सोतापन्न व्यक्ति में बुद्ध, धम्म और संघ के प्रति अटूट सद्धा होती है वह न तो पाँच सीलों को तोड़ता और न ही छह जघन्य अपराध (1.माता की हत्या, 2.पिता की हत्या, 3.अरहन्त की हत्या 4. आत्महत्या 5. संघभेद 6. बुद्ध को चोट पहुँचना) नहीं करता है। वह अपाय भूमि 4 में जन्म लेने से मुक्त हो जाता है। वह कभी भी आत्मज्ञान को प्राप्त कर सकता है।
By Paramattha Dhamma Sikkhaya Foundation
Comments