धम्मचक्कप्पवत्तनसुत्तं
धम्मचक्कप्पवत्तनसुत्तं
(सुत्तपिटक- संयुत्तनिकाय, महावग्गो 12. सच्चसंयुत्त धम्मचक्कप्पवत्तनवग्गो)
१०८१.एवं मे सुत्तं एकं समयं भगवा बाराणसियं विहरति इसिपतने मिगदाये। तत्र खो भगवा पञ्&zw... Read More...
तावतिंस देवलोक से बुद्ध पृथ्वी पर आये (संकिसा)
तावतिंस देवलोक से बुद्ध पृथ्वी पर आये
(जिसे देवोरोहण (देवों का उदय होना) के नाम से जाना जाता है)
भगवान बद्ध आठवें चंद्रमास की पूर्णिमा पर अपनी माता महामाया
को अभि... Read More...
विचारों की प्रक्रिया
अभिधम्म के अनुसार जब किसी वस्तु को पाँच द्वारों (आँख, नाक, कान, जीभ और शरीर इन्द्रियों) के माध्यम में से किसी एक के माध्यम से दिमाग में डाला जाता है तो एक विचार की प्रक्रिया निम्नानुसार चलती है-
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चार सम्यक प्रधान
चार सम्यक प्रधान-
- उप्पन्नानं पापकानं धम्मानं पहानाय वायामो (उत्पन्न हुई अकुसल अवस्थाओं को नष्ट करना)
- अनुप्पन्नानं पापकानं धम्मानं पहानाय वायामो (जो-उत्पन्न नहीं हुए अकुसल अवस्थाओं को उत्पन्न न होने देन... Read More...
विसाखा-एक दिन की बात
एक दिन की बात है-
विशाखा अपने ससुर मिगार सेठ को अपने हाथ से पका कर ताजा-गर्म भोजन स्वयं परोस कर खिला रही थी। मिगार सेठ सोने-चांदी के बर्तनों में भोजन करता था। भोजन के समय ही एक भिक्खु द्वार पर आ खड़ा हुआ। विशाखा के मन में बुद्ध प्रमुख भि... Read More...
By Paramattha Dhamma Sikkhaya Foundation