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हम नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मा सम्बुद्धस्स तीन बार क्यों बोलते हैं?

हम नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मा सम्बुद्धस्स तीन बार क्यों बोलते हैं?

नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मा सम्बुद्धस्स

 हम तीन बार क्यों बोलते हैं?

 

क्योंकि हम तीन प्रकार के बुद्धों को महाअभिवादन या नमस्कार करते हैं।

पञ्ञाधिका, सद्धाधिका, विरियाधिका

ओवादपातिमोक्ख (माघपूर्णिमा दिवस)

ओवादपातिमोक्ख (माघपूर्णिमा दिवस)

ओवादपातिमोक्ख (माघपूर्णिमा दिवस)

सत्तन्नं भगवन्तानं, सम्मासम्बुद्धानं महेसिनं

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महामोग्गलानत्थेरवत्थु

महामोग्गलानत्थेरवत्थु

महामोग्गलानत्थेरवत्थु

(अट्ठाकथा सुत्तपिटक, धम्मपद, 10 दण्डवग्गो)

यो दण्डेन अदण्डेनसूति इमं धम्मदेसनं सत्था वेळुवने विहरन्तो महामोग्गल्‍लानत्थेरं आरब्भ कथेसि।

एकस्मिञ्हि समये तित्थिया सन्‍निपति... Read More...

दीघनखसुत्तं

दीघनखसुत्तं

४. दीघनखसुत्तं

(सुत्तपिटक, मज्झिमनिकाय, मज्झिमपण्णासपालि ३. परिब्बाजकवग्गो)

२०१. एवं मे सुतं – एकं समयं भगवा राजगहे विहरति गिज्झकूटे पब्बते सूकरखतायं। अथ खो दीघनखो परिब्बाजको ये... Read More...

दीघनखसुत्तं

दीघनखसुत्तं

४. दीघनखसुत्तं

(सुत्तपिटक, मज्झिमनिकाय, मज्झिमपण्णासपालि ३. परिब्बाजकवग्गो)

२०१. एवं मे सुतं – एकं समयं भगवा राजगहे विहरति गिज्झकूटे पब्बते सूकरखतायं। अथ खो दीघनखो परिब्बाजको ये... Read More...