चेतसिक 52

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चेतसिक 52

चेतसिक के चार गुणधर्म है--

 

-चेतसिक हमेशा चित्त के साथ उत्पन्न होता है—एकुप्पादा

- चेतसिक हमेशा चित्त के साथ ही समाप्त होता है—एकुनिरोधा

-चेतसिक सदैव वही आरम्मण ग्रहण करता हैं जो आरम्मण चित्त ग्रहण करता -- एकलम्बना

-चेतसिक हमेशा वही वत्थु साझा करता है जो चित्त करता -- एकवत्थुका

यह बहुत ही महत्वपूर्ण बात है जो हमें हमेशा याद रखनी चाहिए

 

जिनको तीन भागों में बांटा गया

अञ्ञासमान चेतसिक 13

अकुसल चेतसिक 14

सोभना चेतसिक 25


 

अञ्ञासमान चेतसिक 13 -- सब्बाचित्त चेतसिक 7, पकिण्णका चेतसिक 6

सब्बाचित्तचेतसिक 7 -- फस्स (संसारिक भाषा में-स्पर्श), वेदना (संसारिक भाषा में-मनोभाव), सञ्ञा (संसारिक भाषा में-अनुभूति), चेतना (संसारिक भाषा में-प्रयोजन), एकग्गता (संसारिक भाषा में-बारीकी से एक बिन्दु पर ध्यान केन्द्रित करना), जीवित/जीवितिन्द्रिय (संसारिक भाषा में-जीवन की शक्ति या योग्यता), मनसिकार (संसारिक भाषा में-ध्यान)


 

पकिण्णका चेतसिक (प्रासंगिक)6-- वितक्क (संसारिक भाषा में-मन का प्रारंम्भिक अनुप्रयोग करना), विचार (संसारिक भाषा में-मन के निरंतरता का प्रयोग), अधिमोक्ख (संसारिक भाषा में-सही निर्णय), वीरिय (संसारिक भाषा में-वीर्य या प्रयास), पीति (संसारिक भाषा में-आणंदोल्लास, रूचि), छन्द (संसारिक भाषा में-किसी वस्तु के प्रति अभिलाषा)


 

अकुसल चेतसिक 14--मोचतुक्क चेतसिक 4 (यह मोह के चार चेतसिक है)

इसमें चार चेतसिक है-- 1. मोह (संसारिक भाषा में-अज्ञानता), 2. अहिरिक (संसारिक भाषा में-बुरा करने में किसी प्रकार की शर्म नहीं), 3. अनोत्तप्प (संसारिक भाषा में-निडरता से बुराई करना), 4. उद्धच्च (संसारिक भाषा में-बैचनी महसूस करना)

 

लोतिक्क चेतसिक 3 (संसारिक भाषा में-लोभ का समूह) 1. लोभ (संसारिक भाषा में-लालचपन), 2. दिट्ठी (संसारिक भाषा में-गलत धारणायें), 3. मान (संसारिक भाषा में-मान-सम्मान तथा अभिमान काभाव--- जाति मान, धन मान, ज्ञान मान)

 

दोचतुक्क चेतसिक 4 (दोष का समूह ) इसमें चार चेतसिक है

  1. दोस (संसारिक भाषा में-बैर का भाव होना या शत्रुता), 2. इस्सा (संसारिक भाषा में-ईर्ष्या का भाव होना), 3.मच्छरिया चेतसिक (संसारिक भाषा में-कंजूसी), 4. कुक्कुच्च (संसारिक भाषा में-चिन्ता का भाव)

थीदुक्क चेतसिक 2—1. थीन (संसारिक भाषा में-आलसीपन), 2. मिद्ध (संसारिक भाषा में-मन्दता, शरीर की शिथिलता)

विचिकिच्छा 1 (संसारिक भाषा में-शंका अथव भ्रान्ति)

 

सोभन चेतसिक 25

 

सोभन साधारण चेतसिक 19

  1. सद्धा चेतसिक (संसारिक भाषा में-निर्रभता, निष्ठा, ईमान) सद्धा का अर्थ अकुसल को रोकना न कि विश्वास।
  2. सति चेतसिक (संसारिक भाषा में-सचेतन होना) सति का अर्थ आनन्द की सति से है
  3. हिरि चेसतिक (संसारिक भाषा में-बुराई करने से बचना या बुराई करने से शर्माना)
  4. ओत्तप्प चेतसिक (संसारिक भाषा में-बुरा करने से भयभीत होना या डरना)
  5. अलोभ चेतसिक (संसारिक भाषा में-दान-भाव रखना)
  6. अदोष चेतसिक (संसारिक भाषा में-दया-भाव रखना)
  7. तत्रमज्झत्तता चेतसिक(संसारिक भाषा में-समता का भाव)
  8. कायपस्सद्धि चेतसिक (संसारिक भाषा में-शरीर की प्रशान्ति, तसल्ली)
  9. चित्तपस्सद्धि चेतसिक (संसारिक भाषा में-चित्त की प्रशान्ति या तसल्ली)
  10. कायलहुता चेतसिक (संसारिक भाषा में-शरीर का हल्कापन)
  11. चित्तलहुता चेतसिक (संसारिक भाषा में-चित्त का हल्कापन)
  12. काय मुदुता चेतसिक (संसारिक भाषा में-शरीर की कोमलता)
  13. चित्त मुदुता चेतसिक (संसारिक भाषा में-चित्त की कोमलता)
  14. काय कम्मञ्ञता चेतसिक (संसारिक भाषा में-शरीर के अनुकूल क्षमता-यथा सामर्थ्य)
  15. चित्त कम्मञ्ञता चेतसिक (संसारिक भाषा में-चित्त की अनुकूल क्षमता)
  16. काय पागुञ्ञता चेतसिक (संसारिक भाषा में-शरीर की निपुणता या कुसलता)
  17. चित्तपागुञ्ञता चेसतिक (संसारिक भाषा में-चित्त की कुसलता या निपुणता)
  18. कायुजुकता चेतसिक (संसारिक भाषा में-शरीर का सीधापन)
  19. चित्तुजुता चेतसिक (संसारिक भाषा में-चित्त का सीधापन)

 

विरति चेतसिक 3

  1. सम्मावचा चेतसिक (संसारिक भाषा में-सम्यक वणी)
  2. सम्मा कम्म़ञ्ञता चेतसिक (संसारिक भाषा में-सम्यक कर्म)
  3. सम्माआजीव चेतसिक (संसारिक भाषा में-सम्यक आजीविका का निर्वाह करना)

 

अप्पम़ञ्ञा चेतसिक 2

  1. करूणा चेतसिक (संसारिक भाषा में-सहानुभूति)
  2. मुदिता चेतसिक (संसारिक भाषा में-परोपकार की प्रशंसा करके जो आनन्द मिलता उसको मुदिता कहते है)

 

पञ्ञिन्दरिय चेतसिक 1

  1. पञ्ञा चेतसिक (संसारिक भाषा में-प्रज्ञा, प्रज्ञता या बुद्धिमत्ता)

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