दंदकम्म दस सिक्खापद:- Viewers(1)
दंदकम्म दस सिक्खापद:-
1. विकालभोजनो होति—12 बजे के बाद भोजन करना।
2.नच्च गीत वदितविस्सूक दस्सनो होति—नृत्य व मनोरंजन आदि में शामिल होना।
3. मालागन्ध विलेपन धारण मण्डन विभूसनट्ठानो होति—इत्र और सौंदर्य प्रसाधनों का प्रयोग करना।
4. उच्चासयना महासयनो होति—ऊँचे बिस्तर पर लेटना, बैठना या सोना।
5. जातरूपरजत पटिगहनो होति—सोना, चाँदी, पैसा आदि स्वीकार करना।
6. भिक्खूणं अलाभाय परिसक्कति होति—भाग्य बताने वले भिक्खुओं का सहारा लेना।
7. भिक्खूणं अनत्थाय परिसक्कति होति—ऐसे कार्य करना जिससे भिक्खुओं को हानि हो।
8. भिक्खूणं अनावसाय परिसक्कति होति—ऐसे कार्य करना जो विहार में रहने से रोकें।
9. भिक्खु अक्कोसति परिभासति होति—भिक्खुओं को गाली देना, डाँटना, निंदा करना, धमकाना।
10.भिक्खु भिक्खूहि भेदेति होति—भिक्खुओं में फूट डालने के लिए उन्हें उकसाना।
पहाण विचिकिच्छा चेतसिक Viewers(1)
पहाण विचिकिच्छा चेतसिक
(अभिधम्म पिटक-धम्मसंगिनि-निक्खेपकण्डं 1008) दुकनिक्खेपकथा 1063)
हम अभिवादन करते हैं विचिकिच्छा चेतसिक को पहाण (नष्ट) करने के लिए
विचिकिच्छा चेतसिक, वो कर्म बनाते हैं जो मोहमूल चित्त के द्वारा हमें अपाय भूमि 4 की ओर लेकर जाते है
उपेक्खासहगतं विचिकिच्छा सम्पयुत्तं असंखारिकं कामावचर अकुसल मोहमूलचित्तं।
जो इस प्रकार से आते है
बुद्धे कंखति* (बुद्ध के प्रति शंकायें)
धम्मे कंखति (धम्म के प्रति शंकायें)
संघे कंखति (संघ के प्रति शंकायें)
सिक्खाय कंखति (बुद्ध की शिक्षाओं के प्रति शंकायें)
पुब्बन्ते कंखति (पुनर्भवके प्रति शंकायें)
अरपन्ते कंखति (आने वले भव के प्रति शंकायें (18 धातु, 5 स्कन्द और 12 आयतन जो आने वला जन्म तय करते))
पुब्बन्तापरन्ते कंखति (पूनर्भव और आने वले भव के प्रति शंकायें (18 धातु, 5 स्कन्द और 12 आयतन जो आने वला जन्म तय करते)) 18 धातु- *चक्खु धातु, सोतधातु, घानधातु,जिव्हाधातु, कायधातु,मनो धातु, रूपधातु, सद्धधातु,गन्धधातु, रसधातु, फोत्थब्बधातु-(इसमें रूप के तीन प्रकार पठवीधातु, तेजोधातु, वयोधातु), धम्मधातु, चक्खुविञ्ञाण धातु, सोतविञ्ञाण धातु, घानविञ्ञाण धातु, जिव्हाविञ्ञाण धातु, कायविञ्ञाण धातु, मनोविञ्ञाण धातु।
5 स्कन्द-रूप, वेदना, सञ्ञा, संस्कार विञ्ञाण। 12 आयतन-चक्खायतणं, सोतायतणं, घनायतणं, जीवयतणं, कायायतणं, मनायतणं, रूपायतणं, सद्धायतणं, गन्धायतणं, रसायतणं, फोथ्बबायतणं, धम्मायतणं।
इदपच्चयतापटिच्चसमुपन्नेसु धम्मेसु कंखति (कारण और परिणाम को लेकर शंकायें)
बुद्ध जीवितं याव निब्बाणं सरणं गच्छामि (महाअभिवादन)
पुग्गल को पता है कि विचिकिच्छा चेतसिक को कैसे पहाण करना है
- (ज्यादा से ज्यादा धम्म को सुनना)
- (धम्म के आधार पर शंकाओं को दूर करना)
विनये पकत़ञ्ञुता (विनय या सीलों में पक्का होना)
अधिमोक्ख बहुलता (निर्णय लेना की क्षमता)
- (सच्चे मित्र बनाना जो अपने मित्र को हमेशा धम्म के मार्ग की अग्रसर करते रहे)
- (उपयुक्त स्थान पर निवस करना) लोकुत्तर चित्त या परमशान्ति की अनुभूति हो जाना) – निब्बान
धम्मं जीवितं याव निब्बाणं सरणं गच्छामि (महाअभिवादन)
- (ज्यादा से ज्यादाधम्म को सुनना)
- (धम्म के आधार शंकाओं को दूर करना)
विनये पकत़ञ्ञुता (विनय या सीलों में पक्का होना)
अधिमोक्ख बहुलता (निर्णय लेना की क्षमता)
- (सच्चे मित्र बनाना जो अपने मित्र को हमेशा धम्म के मार्ग की अग्रसर करते रहे)
- (उपयुक्त स्थान पर निवस करना) लोकुत्तर चित्त या परमशान्ति की अनुभूति हो जाना) – निब्बान
संघं जीवितं याव निब्बाणं सरणं गच्छामि (अभिवाद)
बहुसुत्तता -- (ज्यादा से ज्यादाधम्म को सुनना)
- (धम्म के आधार शंकाओं को दूर करना)
विनये पकत़ञ्ञुता -- (विनय या सीलों में पक्का होना)
अधिमोक्ख बहुलता-- (निर्णय लेना की क्षमता)
- (सच्चे मित्र बनाना जो अपने मित्र को हमेशा धम्म के मार्ग की अग्रसर करते रहे)
- (उपयुक्त स्थान पर निवस करना) लोकुत्तर चित्त या परमशान्ति की अनुभूति हो जाना) – निब्बान
बीस आर्य मार्ग प्राप्त हो (महाअभिवादन), बीस सामान्य फल प्राप्त हो (महाअभिवादन), एकाएक इसी जीवन में निब्बान की प्राप्ति हो (महाअभिवादन)
By Paramattha Dhamma Sikkhaya Foundation
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