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रूप  28

रूप  28

रूप  28

28 रूप को 9 भागों में बांटा गया जो निम्नवत है—

महाभूत रूप 4

उपादाय रूप 24

 

महाभ... Read More...

चेतसिक 52

चेतसिक 52

चेतसिक 52

चेतसिक के चार गुणधर्म है--

 

-चेतसिक हमेशा चित्त के साथ उत्पन्न होता है—एकुप्पादा

- चेतसिक हमेशा चित्त के साथ ही समाप्त होता ह... Read More...

लक्खणादिचतुक्क

लक्खणादिचतुक्क

लक्खणादिचतुक्क

 

चित्तलक्खणा दिचतुक्क

विज्जानन लक्खणं

पुब्बंगम रसं

सन्धानपच्चुपत्थानं

नामरूप पदत्थानं

अकुसलचित्त लक्खणा दिचतुक्क... Read More...

५. केसमुत्तिसुत्तं

५. केसमुत्तिसुत्तं

५. केसमुत्तिसुत्तं (सुत्तपिटक-अंगुत्तरनिकाय तिकनिपात (७) २. महावग्गो)

६६. एवं मे सुतं – एकं समयं भगवा कोसलेसु चारिकं चरमानो महता भिक्खुसङ्घेन सद्धिं येन केसमुत्तं केसपुत्तं (सी॰ स्या॰ कं॰ पी॰) नाम कालामानं निगमो तदवस... Read More...

कालामसुत्त

कालामसुत्त

उस समय भगवान बुद्ध विशाल भिक्षु संघ के साथ कोसल जनपद में विचरण करते हुए केसपुत्त नामक कालामों के निगम (कस्बे) में पहुंचे।

तब केसपुत्त निवासी कालामों को ऐसा सुनने में आया: "हे भद्रजनों! शाक्यकुल से प्रव्रजित (संन्यास लिए हुए) शाक्यपु... Read More...