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महापथवीसक्खिअहोसि

महापथवीसक्खिअहोसि

अट्ठकथा सुत्तपिटक मज्झिमनिकाय मूलपण्णास ओपम्मवग्गो, निवापसुत्तवण्णना 47)

 

बोधिसत्व सिद्धार्थ ने पूर्णिमा के दिन पहली महान विजय देवपुत्त मार के ऊपर प्राप्त की। बोधिसत्व अदृश्य मुद्रा में सिंहासन पर विराजमान हुए और संकल्प क... Read More...

रूप  28

रूप  28

रूप  28

28 रूप को 9 भागों में बांटा गया जो निम्नवत है—

महाभूत रूप 4

उपादाय रूप 24

 

महाभ... Read More...

चेतसिक 52

चेतसिक 52

चेतसिक 52

चेतसिक के चार गुणधर्म है--

 

-चेतसिक हमेशा चित्त के साथ उत्पन्न होता है—एकुप्पादा

- चेतसिक हमेशा चित्त के साथ ही समाप्त होता ह... Read More...

लक्खणादिचतुक्क

लक्खणादिचतुक्क

लक्खणादिचतुक्क

 

चित्तलक्खणा दिचतुक्क

विज्जानन लक्खणं

पुब्बंगम रसं

सन्धानपच्चुपत्थानं

नामरूप पदत्थानं

अकुसलचित्त लक्खणा दिचतुक्क... Read More...

५. केसमुत्तिसुत्तं

५. केसमुत्तिसुत्तं

५. केसमुत्तिसुत्तं (सुत्तपिटक-अंगुत्तरनिकाय तिकनिपात (७) २. महावग्गो)

६६. एवं मे सुतं – एकं समयं भगवा कोसलेसु चारिकं चरमानो महता भिक्खुसङ्घेन सद्धिं येन केसमुत्तं केसपुत्तं (सी॰ स्या॰ कं॰ पी॰) नाम कालामानं निगमो तदवस... Read More...