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रूप 28
28 रूप को 9 भागों में बांटा गया जो निम्नवत है—
महाभूत रूप 4
उपादाय रूप 24
महाभूत रूप 4
पठवी महाभूत रूप 20,
आपो महाभूत रूप 12,
तेजो महाभूत रूप 4,
वयो महाभूत रूप 6
पठवी महाभूत रूप 20
केसा (बाल)
लोमा (लोम)
नक्खा (नाखून)
दन्ता (दाँत)
तचो (त्वचा)
मंसं (मांस)
नहारू (पुट्ठा)
अत्थि (हड्डी)
अत्थिमिञ्जं (ठोस हड्डी)
वक्कं (गुर्दा)
हदयं (दिल)
यकणं (लीवर)
किलोमकं (फेफड़े के पर्दे से संबंधित)
पिहकं (तिल्ली)
पप्फासं (फेफड़े)
अतं (आंत)
अतंगुणं (अन्त्रपेशी)
उदरियं (बिना पचा हुआ भोजन जो पेट के अन्दर है)
करीसं (लीद)
मत्थकेमत्थलुगं (दिमाग)
आपो महाभूत रूप 12
पितं -(पित्त-विकार)
सेमहं- ( गले का कफ)
पुब्बो (मवद)
लोहितं (लहु, खून)
सेदो (पसीना)
मेदो (चर्बी)
अस्सु (आंसू)
वसा (बसा, चिकनाई)
खेलो (लार-Saliva)
सिंघानिका (नाक का कफ)
लसिका (श्र्लेष द्रव-synovial fluid)
मुत्तं (मूत्र)
तेजोमहाभूत रूप 4
- परादाय-अग्गि– शरीर का तापमान जो सामान्यत: 37c रहता है।
- परिणा-अग्गि – पाचन तंन्र की गर्मी
- सन्तप्प-अग्गि – शरीर का बूढा होना।
- जरा-अग्गि – शरीर जब बूढा होता है तो शरीर का सामान्य तापमान घटता-बढता रहता है।
वायोमहाभूत रूप 6
- उद्धंगमावता– जिस वायु के दबाव से डकार और उल्टी आती है
- अधोवता– जिस वायु के दबाव से मल-मूत्र बाहर निकलता है
- कुच्छिसयावता—पेट की वायु
- कोट्ठासयावता– आंतों के अन्दर की वायु
- अंगमंगासारिनोवता– जिस वायु के दबाव से रक्त संचारित होता है
- अस्सासपस्सासोवता – पूरे शरीर की वायु जिसके माध्यम से हम शरीर को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाते हैं।
पसाद रूप 5
- चक्खुपसाद रूप –आन्तरिक नेत्र का रूप
- सोतपसाद रूप–आन्तरिक सोत (कान) का रूप
- घानपसाद रूप–आन्तरिक घान (नाक) का रूप
- जिव्हापसाद रूप–आन्तरिक जिव्हा (जीभ) का रूप
- कायपसाद रूप–आन्तरिक काय का रूप
विसय रूप (गोचर रूप) 4—उद्देश्य वाले रूप
- रूपविसय रूप (वण्ण)– दृश्यमान
- सद्धाविसय रूप (सद्ध)–आवाज
- गन्धविसय रूप (गन्ध)–गन्ध (सुगन्ध, दुर्गन्ध)
- रसविसय रूप (रस)–स्वाद
भाव रूप 2
- इत्थिभाव रूप–स्त्री वाला भाव होना
- पुरिसभाव रूप–पुरूष वाला भाव होना
हदयरूप 1–ह्रदय
जीवितइन्द्रिय रूप 1–जीवन
आहार रूप 1–भोजन
परिच्छेद रूप 1–आकास (सीमा)
विञ्ञत्ति रूप 2
- कायविञ्ञत्ति रूप–काय से संदेश देना
- वचीविञ्ञत्ति रूप–वचा से संदेश देना
विकार रूप 3–
- रूपस्स लहुता– रूप का हल्कापन
- रूपस्स मुदुता–रूप की कोमलता
- रूपस्स कम्मञ्ञता–रूप की व्यावहारिकता
लक्खणा रूप 4–
- रूपस्स उपचयो (उच्चपो)–रूप का उत्पाद
- रूपस्स सन्तति–रूप की निरंतरता
- रूपस्स जरता–रूप का क्षय
- रूपस्स अनिच्चता–रूप की अनित्यता
By Paramattha Dhamma Sikkhaya Foundation
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