Blog

विपस्सनाधम्म

विपस्सनाधम्म

विपस्सनाधम्म

अनिच्च वत संखारा, उप्पाद-वय-धम्मिनो

उप्पज्जित्वा निरूज्झन्ति, तेसं वूपसमो सुखो

सब्बे सत्ता मरन्ति च, मरिन्सु च मरिस्सरे

तथेवाहं मरिस्सामि, नत्थि मे एत्थ संसयो

अचिरं वतयं  कायो, पथ... Read More...

धम्मचक्‍कप्पवत्तनसुत्तं पालि

धम्मचक्‍कप्पवत्तनसुत्तं पालि

धम्मचक्‍कप्पवत्तनसुत्तं

(सुत्तपिटक- संयुत्तनिकाय, महावग्गो 12. सच्चसंयुत्त धम्मचक्‍कप्पवत्तनवग्गो)

१०८१.एवं मे सुत्तं एकं समयं भगव बाराणसियं विहरति इसिपतने मिगदाये। तत्र खो भगव पञ्‍... Read More...

पहाण मोह चेतसिक

पहाण मोह चेतसिक

पहाण मोह चेतसिक (अभिधम्मपिटक – धम्मसंगिनि निक्खेपकण्ड 1106, 12)

  हम अभिवादन करते है मोह चेतसिक को नष्ट करने के लिए

        ... Read More...

पहाण विचिकिच्छा चेतसिक

पहाण विचिकिच्छा चेतसिक

पहाण विचिकिच्छा चेतसिक

                        (अभिधम्म पिटक-धम्मसंगिनि-निक्खेपकण्डं 1008) दुकनि... Read More...

दंदकम्म दस सिक्खापद:-

दंदकम्म दस सिक्खापद:-

दंदकम्म दस सिक्खापद:-

1. विकालभोजनो होति—12 बजे के बाद भोजन करना।

2.नच्च गीत वदितविस्सूक दस्सनो होति—नृत्य व मनोरंजन आदि में शामिल होना।

3. मालागन्ध विलेपन धारण मण्डन विभूसनट्ठानो होति&mda... Read More...