विसाखा-एक दिन की बात
एक दिन की बात है-
विशाखा अपने ससुर मिगार सेठ को अपने हाथ से पका कर ताजा-गर्म भोजन स्वयं परोस कर खिला रही थी। मिगार सेठ सोने-चांदी के बर्तनों में भोजन करता था। भोजन के समय ही एक भिक्खु द्वार पर आ खड़ा हुआ। विशाखा के मन में बुद्ध प्रमुख भि... Read More...
विसाखा मिगार माता
•धनञ्जय सेठ की बेटी विशाखा का यथासमय मीगार सेठ के पुत्र पुण्यवर्धन के साथ श्रावस्ती में विवाह हुआ।
•मायके से विदाई के समय धनञ्जय सेठ ने अपनी पुत्री विशाखा को दस बातें संकेतों में समझायीं:
1. घर की आग बाहर मत ले जाना... Read More...
सिद्धार्थ से बुद्ध बनने तक की यात्रा
सिद्धार्थ से बुद्ध बनने तक की यात्रा
यो वो, आनन्द, मया धम्मो च विनयो च देसितो पञ्ञत्तो, सो वो ममच्चयेन सत्था।
(आनन्द – मैंने जो धम्म एवं विनय का ... Read More...
तिरोकुट्टसुत्तं
(सुत्तपिटक-खुद्दकनिकाय, खुद्दकपाठपालि, 7. तिरोकुट्टसुत्तं) के सुत्त भगवान बुद्ध ने कहा कि सबसे बड़ा उपहार यह हैं, कि अपने मृतक पूर्वजों को अपने कुसल कर्मों का पुण्य देना। तथागत बुद्ध ने कहा कि जो लोग धर्म के मार्ग पर आरूढ़ व्यक्ति को दान देते... Read More...
महापथवीसक्खिअहोसि
- अट्ठकथा सुत्तपिटक मज्झिमनिकाय मूलपण्णास ओपम्मवग्गो, निवापसुत्तवण्णना 47)
बोधिसत्व सिद्धार्थ ने पूर्णिमा के दिन पहली महान विजय देवपुत्त मार के ऊपर प्राप्त की। बोधिसत्व अदृश्य मुद्रा में सिंहासन पर विराजमान... Read More...
By Paramattha Dhamma Sikkhaya Foundation