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सिद्धार्थ से बुद्ध बनने तक की यात्रा

सिद्धार्थ से बुद्ध बनने तक की यात्रा

सिद्धार्थ से बुद्ध बनने तक की यात्रा

   यो वो, आनन्द, मया धम्मो च विनयो च देसितो पञ्‍ञत्तो, सो वो ममच्‍चयेन सत्था।   

   (आनन्द – मैंने जो धम्म एवं विनय का ... Read More...

तिरोकुट्टसुत्तं

तिरोकुट्टसुत्तं

(सुत्तपिटक-खुद्दकनिकाय, खुद्दकपाठपालि, 7. तिरोकुट्टसुत्तं) के सुत्त भगवान बुद्ध ने कहा कि सबसे बड़ा उपहार यह हैं, कि अपने मृतक पूर्वजों को अपने कुसल कर्मों का पुण्य देना। तथागत बुद्ध ने कहा कि जो लोग धर्म के मार्ग पर आरूढ़ व्यक्ति को दान देते... Read More...

महापथवीसक्खिअहोसि

महापथवीसक्खिअहोसि

  • अट्ठकथा सुत्तपिटक मज्झिमनिकाय मूलपण्णास ओपम्मवग्गो, निवापसुत्तवण्णना 47)

 

बोधिसत्व सिद्धार्थ ने पूर्णिमा के दिन पहली महान विजय देवपुत्त मार के ऊपर प्राप्त की। बोधिसत्व अदृश्य मुद्रा में सिंहासन पर विराजमान... Read More...

चंक्कमनचित्त 19

चंक्कमनचित्त 19

सिद्धार्थ के बुद्धत्व प्राप्त करने के बाद, उनके स्वरूप में कोई बदलाव नहीं हुआ। इसलिए देवता भी चिन्तित थे। कि क्या वे बुद्ध हैं या नहीं। इस प्रकार बुद्ध ने हवा में 19 कदम चलकर देवताओं को यह सिद्ध किया,कि उन्होने सभी 31भूमियों से अपने पुनर्भव का पूर... Read More...

नवुति-उप-निधि-भन्द 90

नवुति-उप-निधि-भन्द 90

नवुति-90

उप-उच्च, सर्वश्रेष्ठ

निधि-खजाना, (ऐसा खजाना जिसे कोई आपसे चाहकर भी छीन नहीं सकता)

भन्द- बनाना , अनुमोदामि- ऐसे कुसल कर्म का अनुमोदन करना

पुब्बचेतना (पूर्व)

पुण्यकिरियावत्थु 10 जब तीनों चेत... Read More...